डॉक्टर बोले- इनसे दूसरों को ज्यादा खतरा
कोलकाता
देशभर में कोरोना वैक्सीन की पहली या दोनों डोज लगवाने के बाद लोगों के संक्रमित होने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि ऐसे मरीज अपेक्षाकृत जल्दी ठीक हो रहे हैं और कई मामलों में उनके गंभीर होने की नौबत नहीं आती है। हालांकि ऐसे मरीज बिना वैक्सीन लेने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहे हैं और एक तरह के 'सुपर स्प्रेडर' साबित हो सकते हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने अपनी हालिया स्टडी में ये चिंताएं जाहिर की हैं।
वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद संक्रमित हो रहे लोग
ऐसे कई मामले हैं, जहां वैक्सीन की पहली डोज लगने के बाद लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने शुरू हो गए। हालांकि डॉक्टर ऐसे लोगों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है और इन लोगों के संपर्क में आए हैं, मगर कोई लक्षण नहीं है। ऐसे लोग दूसरों के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
अस्पतालों में भर्ती ज्यादातर गंभीर मरीज बिना वैक्सीन वाले हैं
अस्पतालों में अधिकांश गंभीर मामले ऐसे हैं, जिनके वैक्सीन नहीं लगी है। हालांकि वे संक्रमित कहां से हुए, इसके कई सोर्स हो सकते हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि उनमें से कुछ को संक्रमित परिवार के सदस्यों से संक्रमण हुआ होगा जो खुद संक्रमित हो गए थे, मगर असिम्टोमैटिक थे।
'पहली डोज के बाद एंटीबॉडी बनने में 6-8 हफ्ते लगते हैं बशर्ते...'
पियरलेस हॉस्पिटल में क्लिनिकल डायरेक्टर (रिसर्च एंड एकेडमिक्स) शुभ्रोज्योति भौमिक ने कहा कि वैक्सीन की पहली डोज लेने वाले शख्स में एंटीबॉडी के मैक्सिमम लेवल को पाने में करीब छह-आठ हफ्ते का समय लग सकता है, बशर्ते दूसरी खुराक भी दिलाई गई हो। उन्होंने कहा कि 'इस बीच की अवधि में, वह शख्स संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होता है, लेकिन अधिकांश मामलों में, वह असिम्टोमैटिक रहेगा। इसलिए, वे यह नहीं जान पाएंगे कि वे संक्रमित हैं और अपने आस-पास के लोगों को संक्रमित करेंगे।' क्लिनिकल ट्रायल विशेषज्ञ और स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के क्लिनिकल और प्रायोगिक फार्माकोलॉजी के पूर्व प्रमुख, शांतनु त्रिपाठी ने भी आगाह किया कि वैक्सीन के बाद मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियां बरतना छोड़ देना खतरे को बुलावा देना है। उन्होंने कहा, 'वैक्सीन वायरस के प्रसार को रोकने के लिए नहीं है। यह वायरस के खिलाफ एक व्यक्ति की इम्युनिटी को बढ़ाती है और संक्रमण की गंभीरता को कम करती है। इसलिए कोई शख्स वैक्सीन लेने के बाद अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकता है, मगर उसके आसपास के अन्य लोग नहीं हो सकते हैं।'

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